मॉर्ले-मिंटो

1. पहला कानून: मॉर्ले-मिंटो सुधार (1909)

अंग्रेजों ने भारत पर राज करने और भारतीयों को शांत रखने के लिए दो अलग-अलग सालों (1909 और 1919) में दो नए कानून/नियम बनाए थे।

  • यह नाम क्यों पड़ा?

    उस समय इंग्लैंड में बैठे अफसर का नाम मॉर्ले था और भारत में बैठे मुख्य अफसर (वायसराय) का नाम मिंटो था। दोनों ने मिलकर यह नियम बनाया, इसलिए नाम पड़ा मॉर्ले-मिंटो सुधार।

  • अंग्रेजों ने क्या चाल चली? (फूट डालो और राज करो)

    उन्होंने पहली बार “सांप्रदायिक निर्वाचन” (Separate Electorate) की शुरुआत की।

    • इसका मतलब क्या था? देश में मुस्लिम नेताओं को चुनने का अधिकार केवल मुस्लिम जनता को ही दिया गया।

    • नतीजा: अंग्रेजों ने हिंदू और मुसलमानों के बीच राजनीति में पहली बार धर्म की दीवार खड़ी कर दी। इसीलिए लॉर्ड मिंटो को “भारत में सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक” कहा जाता है।

  • भारतीयों को क्या मिला?

    • पहली बार सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा (S.P. Sinha) नाम के भारतीय को अंग्रेजों की मुख्य टीम (Executive Council) में शामिल किया गया।

    • भारतीय नेताओं को बजट पर सवाल पूछने की अनुमति मिली, लेकिन असली फैसला लेने की ताकत अंग्रेजों के पास ही रही।

Step 1: यह कानून क्यों लाया गया? (पृष्ठभूमि / Background)

अंग्रेजों ने 1909 में यह कानून 4 मुख्य कारणों से बनाया:

  1. बंगाल विभाजन (1905): लॉर्ड कर्जन ने बंगाल के दो टुकड़े कर दिए, जिससे भारतीय जनता बहुत गुस्सा हो गई और अंग्रेजों के खिलाफ ‘स्वदेशी आंदोलन’ शुरू कर दिया।

  2. मुस्लिम लीग की मांग (1906): मुस्लिम नेताओं का एक दल (आगा खां के नेतृत्व में) वायसराय लॉर्ड मिंटो से मिला और मुसलमानों के लिए अलग राजनीतिक अधिकार मांगे।

  3. क्रांतिकारियों का डर: कांग्रेस में लाल-बाल-पाल (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल) जैसे गरम दल के नेताओं का प्रभाव बढ़ रहा था।

  4. अंग्रेजों की चाल: अंग्रेज चाहते थे कि वे गरम दल के नेताओं को अलग कर दें, नरम दल वालों को थोड़ा लालच देकर शांत करें और हिंदुओं तथा मुसलमानों की एकता को तोड़ दें।

Step 2: इस कानून में क्या-क्या मुख्य बदलाव हुए? (मुख्य नियम)

1. धर्म के आधार पर चुनाव (सांप्रदायिक निर्वाचन)

  • क्या नियम बना? पहली बार मुसलमानों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र बनाए गए। इसका मतलब था कि मुस्लिम नेता को केवल मुस्लिम जनता ही वोट देकर चुन सकती थी।

  • असर: अंग्रेजों ने आधिकारिक रूप से “फूट डालो और राज करो” की नीति शुरू की। इसी वजह से लॉर्ड मिंटो को “सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक” कहा जाता है।

2. नेताओं की संख्या में बढ़ोतरी (विधान परिषदों का विस्तार)

  • केंद्र में: अंग्रेजों की संसद (केंद्रीय विधान परिषद) में भारतीय/अन्य सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ाकर 60 कर दी गई। (लेकिन मुख्य अधिकार फिर भी अंग्रेज अफसरों के पास ही रहे)।

  • राज्यों (प्रांतों) में: बंगाल, मद्रास, बॉम्बे आदि में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई।

3. भारतीय नेताओं को मिले नए अधिकार

  • अब भारतीय नेता बजट (देश के खर्चों) पर चर्चा कर सकते थे।

  • वे सरकार से सवाल (अनुपूरक प्रश्न) पूछ सकते थे।

  • लेकिन बड़ी शर्त: वायसराय के पास ‘वीटो पावर’ (Veto Power) थी, यानी वह भारतीय नेताओं के किसी भी प्रस्ताव को पल भर में रद्द कर सकता था।

4. मुख्य टीम में भारतीय की एंट्री

  • वायसराय की खास कार्यकारी टीम (Executive Council) में सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा (S.P. Sinha) को कानून मंत्री (Law Member) के रूप में शामिल किया गया। वह इस टीम में शामिल होने वाले पहले भारतीय थे।

Step 3: यह कानून क्यों नाकाम रहा? (आलोचना)

  • दिखावा ज्यादा, अधिकार कम: अंग्रेजों ने भारतीयों को सवाल पूछने की छूट तो दी, लेकिन कोई भी बड़ा फैसला लेने की असली ताकत अपने पास ही रखी।

  • देश का नुकसान: इस कानून ने हिंदू और मुसलमानों के बीच दूरी बढ़ाने का काम किया।

  • गंभीर परिणाम: इसी वजह से महात्मा गांधी ने कहा था—“1909 के अधिनियम ने हमारा सर्वनाश कर दिया।”

2. दूसरा कानून: मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919)

  • यह नाम क्यों पड़ा?

    10 साल बाद इंग्लैंड के अफसर मॉन्टेग्यू और भारत के वायसराय चेम्सफोर्ड ने मिलकर एक नया नियम बनाया।

  • सबसे बड़ा बदलाव: प्रांतों में “द्वैध शासन” (Dyarchy)

    द्वैध शासन का सीधा मतलब है “दोहरा शासन” (ताकत का दो हिस्सों में बंटवारा)। राज्यों/प्रांतों के विभागों को दो हिस्सों में बांट दिया गया:

    1. कीमती विभाग (आरक्षित विषय): पुलिस, जेल, न्याय, पैसा (वित्त)। ये सब अंग्रेज अफसरों के पास रहे।

    2. साधारण विभाग (हस्तांतरित विषय): शिक्षा, सफाई, स्वास्थ्य, खेती। ये भारतीय मंत्रियों को सौंप दिए गए।

      (अब आप ही सोचिए, बिना पैसों और पुलिस के भारतीय मंत्री शिक्षा या स्वास्थ्य कैसे सुधारते? इसीलिए यह पूरी तरह नाकाम रहा।)

  • अन्य बड़े बदलाव:

    • पहली बार जनता को सीधे वोट देने का अधिकार मिला (लेकिन बहुत कम लोगों को, जो अमीर या टैक्स देते थे)।

    • देश में पहली बार दो सदन (Two Houses) बने—जैसे आज हमारी लोकसभा और राज्यसभा हैं।

    • अंग्रेजों ने फूट डालने की नीति को और बढ़ाया और सिखों तथा ईसाइयों के लिए भी अलग चुनाव प्रणाली लागू कर दी।

यह 1919 का मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919 Act) है। इसे समझने के लिए पूरी कहानी को 3 आसान स्टेप्स में विभाजित किया गया है:

स्टेप 1: यह कानून क्यों बना? (पृष्ठभूमि / Background)

अंग्रेजों ने 1919 में यह नया कानून अचानक नहीं बनाया, बल्कि इसके पीछे 4 बड़ी वजहें थीं:

  1. पहला विश्व युद्ध (1914-1918): युद्ध में अंग्रेजों ने भारतीयों के पैसे और सैनिकों (जन-धन) का जमकर इस्तेमाल किया। भारतीयों को लगा कि मदद के बदले अंग्रेज हमें खुद का राज (स्वशासन) चलाने की छूट देंगे।

  2. देश में उठती मांग (1916): बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने “होम रूल आंदोलन” चलाकर पूरे देश में यह मांग तेज कर दी कि भारत में भारतीयों का शासन होना चाहिए।

  3. नेताओं की एकजुटता (1916): कांग्रेस के नरम दल और गरम दल एक हो गए, और साथ ही कांग्रेस और मुस्लिम लीग भी हाथ मिला चुके थे। अंग्रेजों पर दबाव बहुत बढ़ गया था।

  4. अंग्रेजों की घोषणा (20 अगस्त 1917): दबाव में आकर अंग्रेज अफसर मॉन्टेग्यू ने वादा किया कि “हम धीरे-धीरे भारत में भारतीयों की सरकार (Responsible Government) बनाएंगे।” इसी वादे को पूरा करने के लिए 1919 का कानून लाया गया।

स्टेप 2: इस कानून में अंग्रेजों ने क्या-क्या नियम बनाए? (मुख्य नियम)

1. राज्यों में दोहरी सरकार (द्वैध शासन / Dyarchy)

राज्यों के सारे कामों को दो हिस्सों में बांट दिया गया:

  • कीमती काम (आरक्षित विषय): पुलिस, न्याय, जेल, पैसा। ये सब अंग्रेज अफसरों ने अपने पास रखे।

  • दिखावे के काम (हस्तांतरित विषय): शिक्षा, सफाई, अस्पताल, खेती। ये सब भारतीय मंत्रियों को सौंप दिए।

2. दिल्ली (केंद्र) में दो सदन बनाए गए

जैसे आज हमारे पास लोकसभा और राज्यसभा हैं, वैसे ही पहली बार दो सदन बनाए गए:

  • ऊपरी सदन (राज्य परिषद): इसमें 60 सदस्य थे (5 साल का समय)।

  • निचला सदन (केंद्रीय विधानसभा): इसमें 144 सदस्य थे (3 साल का समय)।

3. जनता के लिए सीधे चुनाव (Direct Elections)

पहली बार आम जनता को सीधे अपना नेता चुनने का मौका मिला, लेकिन वोट देने का हक बहुत कम (लगभग 10%) अमीर, पढ़े-लिखे या टैक्स देने वाले लोगों को ही था।

4. फूट डालने का विस्तार

1909 में अंग्रेजों ने केवल मुस्लिम भाइयों के लिए अलग चुनाव रखे थे, 1919 में इसे बढ़ाकर सिख, ईसाई और एंग्लो-इंडियन के लिए भी अलग चुनाव कर दिया ताकि लोग आपस में बंट जाएं।

5. बजट और अफसरशाही का फैसला

  • बजट: राज्यों को अपना बजट खुद बनाने की छूट दी गई (पहले दिल्ली से ही पूरा बजट बनता था)।

  • सरकारी नौकरी आयोग: अफसरों की भर्ती के लिए एक आयोग बनाने की बात कही गई, जिससे आगे चलकर (1926 में) UPSC जैसा लोक सेवा आयोग बना।

स्टेप 3: यह कानून क्यों फेल हो गया? (आलोचना)

  1. पैसा अंग्रेजों के पास, काम भारतीयों के पास:

    भारतीय मंत्रियों को शिक्षा और स्वास्थ्य सुधारने का काम तो मिला, लेकिन उसके लिए बजट (पैसा) अंग्रेजों के कब्जे में था। बिना पैसे के कोई मंत्री काम कैसे करता? इसीलिए यह “द्वैध शासन” बुरी तरह फेल हो गया।

  2. नेताओं की निराशा:

    बाल गंगाधर तिलक ने कहा कि यह कानून ऐसा है जैसे “बिना सूरज का सवेरा”—यानी रोशनी का वादा तो था, पर उजाला बिल्कुल नहीं था।

3. दोनों सुधारों का मुख्य अंतर (Direct Comparison Table)

तुलना का आधारमॉर्ले-मिंटो सुधार (1909)मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919)
मूल उद्देश्यनरमपंथियों को खुश करना और सांप्रदायिकता फैलाना“उत्तरदायी सरकार” (Responsible Govt) का वादा करना
शासन प्रणालीकोई उत्तरदायी शासन नहीं, केवल सलाहकार परिषदेंप्रांतों में आंशिक उत्तरदायी शासन (द्वैध शासन / Dyarchy)
सांप्रदायिक चुनावकेवल मुस्लिमों के लिए लागूसिख, ईसाई, एंग्लो-इंडियन तक विस्तारित
केंद्रीय विधायिकाएक सदनीय (Unicameral)द्विसदनीय (Bicameral – Upper & Lower House)
चुनाव का तरीकाअप्रत्यक्ष निर्वाचन (Indirect)प्रत्यक्ष निर्वाचन की शुरुआत (Direct)
बजट नियंत्रणकेवल बहस और प्रश्न पूछने की अनुमतिप्रांतीय बजट को केंद्रीय बजट से अलग किया गया

1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधार और 1919 के मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार में प्रत्यक्ष (Direct) और अप्रत्यक्ष (Indirect) निर्वाचन का अंतर मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि जनता अपने प्रतिनिधि को सीधे वोट दे सकती थी या नहीं।

1. अप्रत्यक्ष निर्वाचन (Indirect Election) — मॉर्ले-मिंटो सुधार (1909)

तात्पर्य (Meaning):

अप्रत्यक्ष निर्वाचन का मतलब है कि आम जनता (नागरिक) सीधे अपने मुख्य नेताओं को वोट नहीं देती थी। इसमें चुनाव कई चरणों (Levels) में होता था।

1909 अधिनियम के तहत प्रक्रिया:

  1. सबसे पहले आम जनता स्थानीय संस्थाओं (जैसे नगरपालिकाओं या जिला बोर्डों) के प्रतिनिधियों को चुनती थी।

  2. ये चुने हुए प्रतिनिधि मिलकर प्रांतीय विधान परिषदों (State Councils) के सदस्यों को चुनते थे।

  3. इसके बाद, प्रांतीय विधान परिषद के सदस्य केंद्रीय विधान परिषद (दिल्ली/केंद्र) के सदस्यों को चुनते थे।

सरल शब्दों में: जैसे आज भारत में राष्ट्रपति या राज्यसभा सदस्यों का चुनाव होता है—जहाँ जनता सीधे वोट नहीं देती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि वोट डालते हैं। 1909 में अंग्रेजों ने इसी तरीके से जनता को मुख्य सत्ता से दूर रखा था।

2. प्रत्यक्ष निर्वाचन (Direct Election) — मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919)

तात्पर्य (Meaning):

प्रत्यक्ष निर्वाचन का मतलब है कि आम जनता (मतदाता) सीधे जाकर अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देकर चुन सकती थी।

1919 अधिनियम के तहत प्रक्रिया:

  • पहली बार भारत में आम नागरिकों को केंद्रीय विधानसभा (Central Assembly) और प्रांतीय परिषदों के सदस्यों को सीधे वोट देने का अधिकार मिला। 중간 प्रतिनिधि की जरूरत खत्म हो गई।

सरल शब्दों में: जैसे आज हम लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव में सीधे जाकर विधायक या सांसद को वोट डालते हैं, ठीक उसी तरह की शुरुआत 1919 में हुई थी।

मुख्य शर्त (सीमा):

हालांकि चुनाव “प्रत्यक्ष” था, लेकिन सभी भारतीयों को वोट देने का अधिकार नहीं मिला। मताधिकार बहुत सीमित था और केवल उन्हीं लोगों को मिला जो:

  • भारी टैक्स (Tax) देते थे।

  • जिनके पास बड़ी संपत्ति थी।

  • जो उच्च शिक्षित थे।

    (इसी वजह से उस समय देश की कुल आबादी के केवल 10% हिस्से को ही वोट देने का अधिकार मिला था।)

मुख्य अंतर (Quick Summary)

आधारमॉर्ले-मिंटो सुधार (1909)मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919)
चुनाव का प्रकारअप्रत्यक्ष (Indirect)प्रत्यक्ष (Direct)
वोट देने की प्रक्रियाजनता स्थानीय निकायों को चुनती थी, और वे निकाय मुख्य प्रतिनिधियों को चुनते थे।जनता सीधे जाकर अपने प्रतिनिधि/नेता को वोट देती थी।
जनता की भागीदारीन के बराबर (जनता और मुख्य विधायिका के बीच कई स्तर थे)।सीधी भागीदारी, लेकिन सीमित मताधिकार (केवल अमीर/टैक्स भरने वालों के लिए)।

अमित पूनिया

संस्थापक एवं शिक्षक | English Era With Amit Poonia

🌐 englisherawithamitpoonia.com

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Scroll to Top
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x