एटली की घोषणा (Attlee’s Declaration) — 20 फरवरी 1947 का विस्तृत विश्लेषण
20 फरवरी 1947 को ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली (Clement Attlee) ने ब्रिटिश संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ (House of Commons) में भारत के संबंध में एक ऐतिहासिक घोषणा की। इस घोषणा ने भारत की स्वतंत्रता और विभाजन की समय-रेखा तय की।
1. मुख्य बिंदु एवं प्रावधान (Key Features)
सत्ता हस्तांतरण की समय-सीमा:
ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि 30 जून 1948 तक भारत की सत्ता अंतिम रूप से उत्तरदायी भारतीय हाथों में सौंप दी जाएगी और अंग्रेज पूरी तरह भारत छोड़ देंगे।
नये वायसराय की नियुक्ति:
लॉर्ड वेवेल (Lord Wavell) को वापस बुलाने और उनके स्थान पर लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) को भारत का नया वायसराय एवं गवर्नर-जनरल नियुक्त करने की घोषणा की गई, ताकि वे सत्ता के सुचारू हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा कर सकें।
संविधान सभा और प्रांतों का भविष्य:
यदि जून 1948 तक कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच कोई सहमति नहीं बनती और एक सर्वसम्मत संविधान नहीं तैयार होता, तो ब्रिटिश सरकार यह तय करेगी कि सत्ता किसे सौंपी जाए—केंद्र सरकार को, या कुछ प्रांतों में प्रांतीय सरकारों को।
2. घोषणा के पीछे की पृष्ठभूमि एवं कारण (Historical Background & Reasons)
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन की स्थिति: विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद ब्रिटेन गंभीर आर्थिक संकट और सैन्य थकान का सामना कर रहा था। उसके पास भारत पर आगे शासन बनाए रखने के लिए संसाधन नहीं थे।
अंतरिम सरकार में विफलता: सितंबर 1946 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार में मुस्लिम लीग के शामिल होने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच लगातार टकराव बना रहा।
सांप्रदायिक अशांति: मुस्लिम लीग द्वारा अगस्त 1946 में शुरू की गई ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही’ (Direct Action Day) के कारण देश भर (विशेषकर बंगाल और पंजाब) में भयानक सांप्रदायिक दंगे फैल गए थे।
भारतीय सशस्त्र बलों का रुख: 1946 का ‘नौसेना विद्रोह’ (Royal Indian Navy Mutiny) और आजाद हिंद फौज (INA) के मुकदमों के बाद अंग्रेजों को समझ आ गया था कि अब भारतीय सैनिक और पुलिस अधिकारी आँख बंद करके ब्रिटिश सत्ता के प्रति वफादार नहीं रहेंगे।
3. एटली की घोषणा का महत्व और परिणाम (Impact & Significance)
मुस्लिम लीग के रुख में कड़ापन:
घोषणा में यह शर्त थी कि यदि केंद्रीय संविधान सभा को सभी का समर्थन नहीं मिला, तो सत्ता प्रांतीय सरकारों को दी जा सकती है। इस शर्त ने मुस्लिम लीग (मोहम्मद अली जिन्ना) को पाकिस्तान की मांग पर और अधिक अड़े रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
माउंटबेटन योजना का मार्ग प्रशस्त होना:
मार्च 1947 में भारत पहुँचकर लॉर्ड माउंटबेटन ने देखा कि देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन रही है। इसलिए उन्होंने जून 1948 का इंतजार करने के बजाय प्रक्रिया को तेज किया और 3 जून 1947 को विभाजन की योजना (‘माउंटबेटन योजना’) पेश की।
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता:
एटली द्वारा तय की गई जून 1948 की समय-सीमा से लगभग 10 महीने पहले ही 15 अगस्त 1947 को भारत को आजाद कर दिया गया और देश का दो अधिराज्यों (भारत और पाकिस्तान) में विभाजन हो गया।
Amit Poonia
Founder & Educator | EnglishEraWithAmitPoonia
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