देशी रियासतों का एकीकरण: सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन की भूमिका (जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर का विलय)
15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय सबसे बड़ी चुनौती 565 से अधिक देशी रियासतों (Princely States) को भारतीय संघ में एकीकृत करना था। ब्रिटिश सरकार ने ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947’ के तहत देशी रियासतों पर से अपनी सर्वोच्चता (Paramountcy) समाप्त कर दी थी और उन्हें यह विकल्प दिया था कि वे भारत या पाकिस्तान में से किसी एक में शामिल हों, या स्वतंत्र रहें।
इस कठिन परिस्थिति में भारत को टुकड़ों में बटने से बचाने (Balkanization) का ऐतिहासिक कार्य सरदार वल्लभभाई पटेल और उनके गृह सचिव वी.पी. मेनन ने कुशलतापूर्वक संपन्न किया।
1. देशी रियासतों का एकीकरण – सरदार पटेल और वी.पी. मेनन की रणनीति
रियासती विभाग (States Department) का गठन: 5 जुलाई 1947 को गृह मंत्री सरदार पटेल के नेतृत्व में रियासती विभाग बनाया गया, जिसके सचिव वी.पी. मेनन नियुक्त हुए।
‘साम, दाम, दंड, भेद’ और कूटनीति: सरदार पटेल ने राजाओं-महाराजाओं को राष्ट्रभक्ति की दुहाई दी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि रक्षा, विदेशी मामले और संचार (Communication) जैसे केवल 3 विषय ही केंद्र सरकार के पास रहेंगे, बाकी आंतरिक मामलों में वे स्वतंत्र रहेंगे।
इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसिन (Instrument of Accession) और प्रीवी पर्स (Privy Purse):
वी.पी. मेनन ने ‘विलय पत्र’ (Instrument of Accession) का मसौदा तैयार किया।
राजाओं को उनकी संपत्ति और राजभत्ता (Privy Purse) सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया। 15 अगस्त 1947 तक अधिकांश रियासतों ने भारत में विलय स्वीकार कर लिया।
2. तीन कठिन रियासतों का विशेष विलय
अधिकतर रियासतों ने भारत में विलय स्वीकार कर लिया, लेकिन जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर ने शुरुआत में भारत में शामिल होने से इनकार कर दिया।
(i) जूनागढ़ का विलय (गुजरात)
समस्या: जूनागढ़ एक तटीय रियासत थी, जिसकी अधिकांश आबादी हिंदू थी, लेकिन यहाँ का नवाब (महाबत खान) मुस्लिम था। नवाब ने अपनी रियासत का विलय पाकिस्तान में करने की घोषणा कर दी, जिसे जिन्ना ने स्वीकार भी कर लिया।
जनता का विद्रोह: जूनागढ़ की जनता ने नवाब के खिलाफ विद्रोह कर दिया और ‘आरजी हुकूमत’ (अस्थायी सरकार) का गठन किया। नवाब डरकर पाकिस्तान भाग गया।
समाधान (जनमत संग्रह): फरवरी 1948 में भारत सरकार ने जूनागढ़ में जनमत संग्रह (Referendum) कराया। जनता ने भारी बहुमत (99% से अधिक) से भारत में विलय के पक्ष में वोट दिया और जूनागढ़ भारत का हिस्सा बन गया।
(ii) हैदराबाद का विलय (ऑपरेशन पोलो)
समस्या: हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी और अमीर रियासत थी। यहाँ का शासक ‘निज़ाम मीर उस्मान अली खान’ अपनी रियासत को स्वतंत्र रखना चाहता था या पाकिस्तान में मिलाना चाहता था।
रज़ाकारों का अत्याचार: निज़ाम के उग्रवादी संगठन ‘रज़ाकारों’ (कासिम रिज़वी के नेतृत्व में) ने स्थानीय बहुसंख्यक आबादी पर भीषण अत्याचार शुरू कर दिए।
समाधान (सैन्य कार्रवाई – ऑपरेशन पोलो): स्थिति बेकाबू होने पर सरदार पटेल ने कड़ा कदम उठाया। 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने हैदराबाद में प्रवेश किया, जिसे ‘ऑपरेशन पोलो’ (Operation Polo) नाम दिया गया। 5 दिनों की कार्रवाई के बाद 17 सितंबर 1948 को निज़ाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और हैदराबाद का भारत में औपचारिक विलय हो गया।
(iii) जम्मू और कश्मीर का विलय
समस्या: कश्मीर के राजा हरि सिंह (हिंदू) थे और बहुसंख्यक आबादी मुस्लिम थी। राजा हरि सिंह ने भारत या पाकिस्तान दोनों में से किसी में भी शामिल न होकर स्वतंत्र रहने का फैसला किया।
पाकिस्तानी कबाइलियों का आक्रमण: अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने समर्थित कबाइलियों और सैनिकों के माध्यम से कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। हमलावर श्रीनगर के करीब पहुँच गए।
समाधान (विलय पत्र पर हस्ताक्षर): राजा हरि सिंह ने भारत से तुरंत सैन्य सहायता मांगी। सरदार पटेल और नेहरू ने स्पष्ट किया कि भारत सेना तभी भेजेगा जब कश्मीर भारत का हिस्सा बनेगा। 26 अक्टूबर 1947 को राजा हरि सिंह ने विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए।
भारतीय सेना की कार्रवाई: 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना श्रीनगर उतरी और हमलावरों को पीछे खदेड़ दिया (जिस क्षेत्र पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा रह गया, उसे पोक/PoK कहा गया)।
3. ऐतिहासिक महत्व
अखंड भारत का निर्माण: सरदार पटेल और वी.पी. मेनन के दृढ़ संकल्प और कूटनीतिक सूझबूझ के कारण बिना किसी बड़े रक्तपात के 560 से अधिक रियासतों को एक तिरंगे के नीचे लाया गया।
‘भारत के लौह पुरुष’ (Iron Man of India): इस अभूतपूर्व एकीकरण के कारण ही सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत का ‘लौह पुरुष’ और ‘आधुनिक भारत का शिल्पकार’ कहा जाता है।
Amit Poonia
Founder & Educator | EnglishEraWithAmitPoonia
🌐 Website: englisherawithamitpoonia.com
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