कृषि के प्रकार (Types of Agriculture): विस्तृत व्याख्या
कृषि (Agriculture) केवल बीज बोने और फसल काटने की प्रक्रिया नहीं है। यह एक ऐसी कला और विज्ञान है, जो इस बात पर निर्भर करती है कि किसान के पास कितनी भूमि उपलब्ध है, वह किन उपकरणों का उपयोग कर रहा है, और उसका अंतिम लक्ष्य क्या है—अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करना या बाज़ार में फसल बेचकर लाभ कमाना।
विश्व के अलग-अलग हिस्सों में जलवायु, मिट्टी की उर्वरता और तकनीक की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणालियाँ विकसित हुई हैं।
अमित सर: बच्चों! मान लीजिए आपके पास दो किसान हैं। एक किसान अपनी छोटी सी जमीन पर सब्ज़ियाँ उगाकर अपने परिवार का पेट पालता है, जबकि दूसरा किसान 500 एकड़ में मशीनरी का उपयोग करके सिर्फ चाय उगाता है और विदेशों में बेचता है। क्या इन दोनों की खेती का तरीका और उद्देश्य एक जैसा है?
प्रिया: बिल्कुल नहीं सर! पहले किसान का उद्देश्य अपने परिवार की भूख मिटाना है, जबकि दूसरे किसान का उद्देश्य व्यवसाय (Business) करना है।
रोहन: और सर, दोनों के पास खेत का आकार और उपयोग की जाने वाली तकनीक भी अलग-अलग है!
अमित सर: शाबाश! इसी उद्देश्य, तकनीक और पूंजी के आधार पर कृषि को मुख्य रूप से दो बड़े वर्गों—निर्वाह कृषि (Subsistence Farming) और वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming) में विभाजित किया जाता है। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
1. निर्वाह कृषि (Subsistence Farming)
जब कोई किसान मुख्यतः अपने और अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खेती करता है, तो इसे निर्वाह कृषि कहते हैं। इसमें उत्पादन का अधिकांश भाग घर में उपयोग हो जाता है और बाज़ार में बेचने के लिए बहुत कम या कुछ भी शेष नहीं बचता।
इसे मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है:
(A) आदिम निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Farming)
यह खेती का सबसे प्राचीन और पारंपरिक रूप है। इसमें किसी आधुनिक मशीनरी या रसायनों का प्रयोग नहीं किया जाता। यह पूरी तरह से मानसून, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और परिवार के सदस्यों के श्रम पर निर्भर होती है।
इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
1. स्थानांतरित कृषि (Shifting Cultivation / झूम खेती):
प्रक्रिया: इसे “कर्तन एवं दहन” (Slash and Burn) कृषि भी कहा जाता है। इसमें किसान जंगल के किसी एक भूखंड के पेड़-पौधों को काटकर जला देते हैं। राख को मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे मिट्टी उपजाऊ हो जाती है।
फसलें: यहाँ मक्का, रतालू, आलू और कसावा जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
स्थान बदलना: 2-3 वर्षों के बाद जब मिट्टी की उर्वरता समाप्त हो जाती है, तो किसान उस भूमि को छोड़कर जंगल के किसी नए हिस्से में चले जाते हैं।
अन्य नाम: इसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय) में ‘झूम’, मेक्सिको में ‘मिल्पा’, और ब्राजील में ‘रोका’ कहा जाता है।
2. चलवासी पशुचारण (Nomadic Herding):
प्रक्रिया: इस प्रकार की कृषि में पशुपालक अपने पशुओं (जैसे भेड़, बकरी, ऊंट, याक) के साथ चारे और पानी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक निश्चित मार्गों पर घूमते हैं।
क्षेत्र: यह मुख्यतः अर्ध-शुष्क और शुष्क प्रदेशों (जैसे सहारा रेगिस्तान, मध्य एशिया और भारत के राजस्थान व जम्मू-कश्मीर) में प्रचलित है।
उत्पाद: इन पशुओं से चरवाहों को दूध, मांस, ऊन और चमड़ा प्राप्त होता है, जो उनके आजीविका का साधन बनता है।
(B) गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Farming)
यह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है और भूमि सीमित होती है।
विशेषता: किसान अपने छोटे से खेत से अधिक से अधिक उत्पादन लेने का प्रयास करता है। इसके लिए वह अधिक मानवीय श्रम (Manual Labor), साधारण औजारों, सिंचाई और उवर्रकों का उपयोग करता है।
फसलें: चावल इसकी मुख्य फसल होती है। इसके अलावा गेहूँ, मक्का, दलहन और तिलहन भी उगाए जाते हैं।
क्षेत्र: यह दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के घनी आबादी वाले मानसूनी प्रदेशों में बहुत प्रचलित है। यहाँ साल में एक से अधिक फसलें उगाई जाती हैं।
2. वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming)
वाणिज्यिक कृषि का मुख्य उद्देश्य फसल या पशु उत्पादों को बाज़ार में बेचकर लाभ (Profit) कमाना होता है। इसमें अधिकांश कार्य बड़ी-बड़ी मशीनों (जैसे ट्रैक्टर, थ्रेशर, कंबाइन हार्वेस्टर) द्वारा किया जाता है और बड़े पैमाने पर पूंजी (Capital) का निवेश होता है।
इसके मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
(A) वाणिज्यिक अनाज कृषि (Commercial Grain Farming)
विशेषता: इसमें फसलें केवल व्यावसायिक उद्देश्य से उगाई जाती हैं। खेत का आकार बहुत बड़ा (सैंकड़ों एकड़) होता है और बुआई से लेकर कटाई तक का सारा काम मशीनों से होता है।
मुख्य फसलें: गेहूँ और मक्का इसकी दो प्रमुख फसलें हैं।
क्षेत्र: यह मुख्यतः उत्तर अमेरिका, यूरोप और एशिया के शीतोष्ण घास के मैदानों (Temperate Grasslands) में की जाती है।
(B) मिश्रित कृषि (Mixed Farming)
विशेषता: इसमें भूमि का उपयोग फसलें उगाने और पशुपालन—दोनों कार्यों के लिए एक साथ किया जाता है। किसान अनाज और चारे की फसलें उगाने के साथ-साथ दुधारू पशु (जैसे गाय, भैंस) या मुर्गी पालन भी करता है।
लाभ: यदि किसी वर्ष फसल खराब भी हो जाए, तो पशुपालक को दूध या मांस बेचकर आय प्राप्त होती रहती है।
क्षेत्र: यह यूरोप, पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में काफी लोकप्रिय है।
(C) रोपण कृषि (Plantation Farming)
यह वाणिज्यिक कृषि का एक विशेष रूप है जो एक व्यापारिक और औद्योगिक मॉडल पर आधारित होता है।
विशेषता: इसमें विशाल क्षेत्र (बड़े बागानों) पर केवल एक ही प्रकार की फसल उगाई जाती है। इसके लिए बड़ी मात्रा में पूंजी, आधुनिक प्रबंधन और सस्ते मजदूरों की आवश्यकता होती है।
संसाधन: इसमें परिवहन के साधनों का मजबूत नेटवर्क होना आवश्यक है ताकि वैज्ञानिक तरीके से कटाई के तुरंत बाद फसल को प्रसंस्करण कारखानों तक पहुँचाया जा सके।
मुख्य फसलें: चाय, कॉफी, काजू, रबड़, गन्ना, केला और कपास।
उदाहरण: भारत और श्रीलंका में चाय, मलेशिया में रबड़, तथा ब्राजील में कॉफी के बड़े-बड़े बागान रोपण कृषि के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हैं।
विभिन्न कृषि प्रणालियों की तुलना (Detailed Comparison Table)
| कृषि का प्रकार | मुख्य उद्देश्य | खेत का आकार | मुख्य साधन / तकनीक | प्रमुख फसलें / उत्पाद | मुख्य क्षेत्र |
| स्थानांतरित कृषि | परिवार का पेट भरना | छोटा (अस्थायी) | पारंपरिक औजार, जंगल जलाकर राख बनाना | मक्का, रतालू, कसावा | पूर्वोत्तर भारत, अमेजन बेसिन |
| चलवासी पशुचारण | जीवन निर्वाह | अनिश्चित (चारागाह) | प्राकृतिक जल और चारे पर निर्भरता | दूध, मांस, ऊन, चमड़ा | राजस्थान, सहारा, मध्य एशिया |
| गहन निर्वाह | सीमित जमीन से अधिक उत्पादन | छोटा | अत्यधिक पारिवारिक श्रम, सिंचाई, उर्वरक | चावल, गेहूँ, दालें | भारत, चीन (घनी आबादी वाले क्षेत्र) |
| वाणिज्यिक अनाज | बाज़ार में बेचकर लाभ | बहुत बड़ा | भारी मशीनरी, आधुनिक तकनीक | गेहूँ, मक्का | उत्तर अमेरिका और यूरोप के मैदान |
| मिश्रित कृषि | लाभ और जोखिम कम करना | मध्यम से बड़ा | फसल उत्पादन + वैज्ञानिक पशुपालन | अनाज, चारा, दुग्ध उत्पाद | यूरोप, पूर्वी USA |
| रोपण कृषि | बड़े पैमाने पर व्यापार/निर्यात | विशाल बागान | भारी पूंजी, वैज्ञानिक प्रबंधन, मजदूर | चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना | भारत, ब्राजील, मलेशिया |
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
झूम खेती (Shifting Cultivation): पर्यावरण की दृष्टि से इसे हानिकारक माना जाता है क्योंकि इसमें वनों की कटाई (Deforestation) होती है।
रोपण कृषि (Plantation): यह कृषि और उद्योग के बीच एक कड़ी (Interface) का काम करती है क्योंकि इसका कच्चा माल सीधे कारखानों में जाता है।
गहन निर्वाह बनाम वाणिज्यिक: गहन निर्वाह कृषि में श्रम (Labor) प्रधान होता है, जबकि वाणिज्यिक कृषि में पूंजी (Capital) और मशीनों की प्रधानता होती है।
अमित पूनिया
संस्थापक एवं शिक्षक | EnglishEraWithAmitPoonia