कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration)
रक्त द्वारा ऑक्सीजन शरीर की हर कोशिका (cell) तक पहुँचाई जाती है। कोशिका के अंदर माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में यह ऑक्सीजन ग्लूकोज को तोड़कर ऊर्जा ($\text{ATP}$) बनाती है:
रक्त परिसंचरण तंत्र के मुख्य अंग (Organs of Circulatory System)
| अंग / घटक (Hindi Name) | अंग्रेजी नाम (English Name) | हिंदी उच्चारण (Transliteration) |
| 1. हृदय | Heart | हार्ट |
| 2. अलिंद (ऊपरी कोष्ठक) | Atrium (Singular) / Atria (Plural) | एट्रियम / एट्रिया |
| 3. निलय (निचले कोष्ठक) | Ventricle | वेन्ट्रिकल |
| 4. कपाट | Valves | वॉल्व्स |
| 5. धमनी | Artery | आर्टरी |
| 6. शिरा | Vein | वेन |
| 7. के शिकाएँ | Capillaries | कैपिलरीज़ |
| 8. महाधमनी | Aorta | एओर्टा |
| 9. महाशिरा | Vena Cava | वेना कावा |
| 10. फुफ्फुस धमनी / शिरा | Pulmonary Artery / Vein | पल्मोनरी आर्टरी / वेन |
मानव हृदय की संरचना (Structure of Human Heart)
मानव हृदय हमारी मुट्ठी के आकार का एक पेशीय अंग (muscular organ) है। इसमें 4 कोष्ठक (4 Chambers) होते हैं:
दायाँ अलिंद (Right Atrium – राइट एट्रियम): अशुद्ध ($\text{CO}_2$ युक्त) रक्त प्राप्त करता है।
दायाँ निलय (Right Ventricle – राइट वेन्ट्रिकल): अशुद्ध रक्त को फेफड़ों में पंप करता है।
बायाँ अलिंद (Left Atrium – लेफ्ट एट्रियम): फेफड़ों से शुद्ध ($\text{O}_2$ युक्त) रक्त प्राप्त करता है।
बायाँ निलय (Left Ventricle – लेफ्ट वेन्ट्रिकल): शुद्ध रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है।
रक्त परिसंचरण की विस्तृत कार्यप्रणाली (Step-by-Step Blood Flow Process)
चरण 1: अशुद्ध रक्त का हृदय में आना (Collection of Deoxygenated Blood)
विवरण: संपूर्ण शरीर की कोशिकाओं से ऑक्सीजन का उपयोग होने के बाद बना अशुद्ध ($\text{CO}_2$ युक्त) रक्त महाशिरा (Vena Cava – वेना कावा) के माध्यम से हृदय के दाएँ अलिंद (Right Atrium) में आता है।
चरण 2: दाएँ निलय से फेफड़ों तक का सफर (Pumping to Lungs)
दायाँ अलिंद सिकुड़ता है और कपाट (Valve) के खुलने पर अशुद्ध रक्त दाएँ निलय (Right Ventricle) में चला जाता है।
इसके बाद दायाँ निलय रक्त को फुफ्फुस धमनी (Pulmonary Artery – पल्मोनरी आर्टरी) के ज़रिए फेफड़ों (Lungs) में पंप कर देता है।
(अपवाद: सभी धमनियों में शुद्ध रक्त बहता है, लेकिन फुफ्फुस धमनी एकमात्र ऐसी धमनी है जिसमें अशुद्ध रक्त बहता है।)
चरण 3: फेफड़ों में रक्त का शुद्धिकरण (Oxygenation in Lungs)
फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) में $\text{CO}_2$ को बाहर छोड़ दिया जाता है और सांस द्वारा ली गई ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) रक्त के हीमोग्लोबिन से जुड़ जाती है। अब यह रक्त शुद्ध (Oxygenated) हो जाता है।
चरण 4: शुद्ध रक्त का पुनः हृदय में आगमन (Return of Pure Blood)
फेफड़ों से शुद्ध रक्त फुफ्फुस शिरा (Pulmonary Vein – पल्मोनरी वेन) के माध्यम से हृदय के बाएँ अलिंद (Left Atrium) में प्रवेश करता है।
(अपवाद: सभी शिराओं में अशुद्ध रक्त बहता है, लेकिन फुफ्फुस शिरा एकमात्र ऐसी शिरा है जिसमें शुद्ध रक्त बहता है।)
चरण 5: पूरे शरीर में शुद्ध रक्त का वितरण (Systemic Circulation)
बायाँ अलिंद सिकुड़कर शुद्ध रक्त को बाएँ निलय (Left Ventricle) में भेजता है।
बायाँ निलय बहुत मजबूत पेशीय दीवार वाला होता है। यह जोर से सिकुड़कर शुद्ध रक्त को शरीर की सबसे बड़ी धमनी महाधमनी (Aorta – एओर्टा) में पंप करता है।
महाधमनी आगे छोटी-छोटी धमनियों और केशिकाओं (Capillaries) में विभाजित होकर पूरे शरीर की प्रत्येक कोशिका तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचा देती है।
रक्त वाहिकाओं के प्रकार (Types of Blood Vessels)
धमनी (Artery – आर्टरी): यह शुद्ध ($\text{O}_2$ युक्त) रक्त को हृदय से दूर शरीर के अंगों तक ले जाती है। इनकी दीवारें मोटी और लचीली होती हैं।
शिरा (Vein – वेन): यह अशुद्ध ($\text{CO}_2$ युक्त) रक्त को शरीर के अंगों से वापस हृदय तक लाती है। इनमें रक्त को उल्टी दिशा में बहने से रोकने के लिए वॉल्व (Valves) होते हैं।
केशिकाएँ (Capillaries – कैपिलरीज़): यह धमनियों और शिराओं को जोड़ने वाली अति-सूक्ष्म वाहिकाएँ हैं, जहाँ गैसों और पोषक तत्वों का सीधा आदान-प्रदान होता है।
मानव उत्सर्जन तंत्र की संरचना (Structure of Excretory System)
मानव शरीर में विभिन्न जैविक क्रियाओं (जैसे पाचन और श्वसन) के दौरान अनेक हानिकारक एवं जहरीले अपशिष्ट पदार्थ (Waste Products) बनते हैं, जैसे—यूरिया (Urea), यूरिक अम्ल (Uric Acid), और अतिरिक्त लवण। इन अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहते हैं, और इसमें भाग लेने वाले अंगों के समूह को उत्सर्जन तंत्र (Excretory System) कहा जाता है।
उत्सर्जन तंत्र के मुख्य अंग (Organs of Excretory System)
| अंग का नाम (Hindi Name) | अंग्रेजी नाम (English Name) | हिंदी उच्चारण (Transliteration) |
| 1. गुर्दे / वृक्क (एक जोड़ा) | Pair of Kidneys | पेयर ऑफ किडनीज़ |
| 2. मूत्रवाहिनी (एक जोड़ा) | Pair of Ureters | पेयर ऑफ यूरेटर्स |
| 3. मूत्राशय | Urinary Bladder | यूरिनरी ब्लैडर |
| 4. मूत्रमार्ग | Urethra | यूरेथ्रा |
| 5. नेफ्रॉन (वृक्काणु) | Nephron | नेफ्रॉन |
1. गुर्दे या वृक्क (Kidneys – किडनीज़)
संरचना: मानव शरीर में सेम के बीज (Bean-shaped) के आकार के दो गुर्दे होते हैं, जो रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पेट के निचले हिस्से में स्थित होते हैं।
कार्य: किडनी का मुख्य कार्य रक्त (Blood) को छानकर उसमें से हानिकारक यूरिया और अपशिष्ट पदार्थों को अलग करना है।
2. नेफ्रॉन (Nephron – नेफ्रॉन – किडनी की कार्यात्मक इकाई)
प्रत्येक किडनी के अंदर लाखों सूक्ष्म छलनियाँ होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन (Nephron) कहते हैं।
छानने की प्रक्रिया: जब गंदा रक्त नेफ्रॉन में स्थित बोमन सम्पुट (Bowman’s Capsule) और केशिकागुच्छ (Glomerulus) से होकर गुजरता है, तो ग्लूकोज, अमीनो एसिड और पानी जैसे उपयोगी पदार्थ पुन: अवशोषित (Reabsorbed) कर लिए जाते हैं, तथा यूरिया युक्त अपशिष्ट पानी में घुलकर मूत्र (Urinary/Urine) बन जाता है।
3. मूत्रवाहिनी (Ureters – यूरेटर्स)
दोनों किडनियों से एक-एक पतली नली निकलती है जिसे मूत्रवाहिनी (Ureter) कहते हैं।
यह नली किडनियों में बने मूत्र को नीचे मूत्राशय तक पहुँचाने का कार्य करती है।
4. मूत्राशय (Urinary Bladder – यूरिनरी ब्लैडर)
यह एक पेशीय थैली (Muscular Bag) जैसी संरचना है जहाँ मूत्र अस्थायी रूप से जमा रहता है।
जब मूत्राशय मूत्र से भर जाता है, तो तंत्रिका तंत्र (Nervous System) मस्तिष्क को इच्छा का संकेत भेजता है।
5. मूत्रमार्ग (Urethra – यूरेथ्रा)
मूत्राशय का निचला हिस्सा एक छोटी नली से जुड़ा होता है जिसे मूत्रमार्ग (Urethra) कहते हैं।
इसके छोर पर स्थित छिद्र के माध्यम से मूत्र को शरीर से बाहर उत्सर्जित (Micturition) कर दिया जाता है।
मानव मूत्र का संगठन (Composition of Human Urine)
एक स्वस्थ वयस्क मनुष्य 24 घंटे में लगभग 1 से 1.8 लीटर मूत्र उत्सर्जित करता है। मूत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित घटक होते हैं:
जल (Water): 95%
यूरिया (Urea): 2.5%
अन्य अपशिष्ट लवण (Other Waste Salts): 2.5%
अन्य सहायक उत्सर्जी अंग (Other Excretory Organs)
किडनी के अलावा शरीर के अन्य अंग भी अपशिष्ट बाहर निकालते हैं:
त्वचा (Skin): पसीने (Sweat) के रूप में अतिरिक्त पानी और लवण (NaCl) बाहर निकालती है।
फेफड़े (Lungs): उच्छ्वसन (Exhalation) द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) बाहर निकालते हैं।
यकृत (Liver): हानिकारक अमोनिया को कम हानिकारक यूरिया में बदलता है।