📚भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना एवं उदारवादी युग (1885–1905)
Topic: राष्ट्रीय चेतना का उदय, कांग्रेस की स्थापना (1885), उदारवादी नेता और ‘धन के निष्कासन का सिद्धांत’
🎭 पात्र (Characters):
अमित सर (Amit Sir): लीड एजुकेटर और इतिहास विशेषज्ञ।
रोहन (Rohan): प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा एक उत्सुक छात्र।
प्रिया (Priya): विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछने वाली मेधावी छात्रा।
🎬 संवाद (Classroom Conversation)
(अमित सर ब्लैकबोर्ड पर मुख्य शीर्षक लिखते हैं: ‘भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रथम चरण: कांग्रेस की स्थापना एवं उदारवादी युग (1885–1905)’.)
अमित सर: गुड मॉर्निंग बच्चों! पिछली क्लास में हमने देखा कि 19वीं सदी के सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलनों ने भारतीयों के मन में अपने अधिकारों और संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा की। आज हम भारतीय इतिहास के उस मोड़ पर चर्चा करेंगे जहाँ से संगठित स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई—भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और उदारवादी युग (1885–1905)।
रोहन: गुड मॉर्निंग सर! सर, कांग्रेस की स्थापना से ठीक पहले पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाली राष्ट्रीय चेतना (National Consciousness) का विकास कैसे हुआ?
🌐 1. राष्ट्रीय चेतना का उदय (Rise of National Consciousness)
अमित सर: रोहन, 1857 के बाद तीन मुख्य कारकों ने राष्ट्रीय चेतना के विकास में ईंधन का काम किया:
पाश्चात्य शिक्षा (Western Education): अंग्रेजी भाषा के प्रसार से भारत के विभिन्न प्रांतों (बंगाल, बॉम्बे, मद्रास) के बुद्धिजीवी एक-दूसरे से संवाद करने में सक्षम हुए। उन्होंने जॉन लॉक, मिल और रूसो जैसे पश्चिमी विचारकों के स्वतंत्रता, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद के विचारों को पढ़ा।
समाचार पत्रों और प्रेस की भूमिका (Role of Press): ‘द हिंदू’, ‘अमृत बाजार पत्रिका’, ‘केसरी’ और ‘मराठा’ जैसे समाचार पत्रों ने ब्रिटिश नीतियों की पोल खोली और देश भर के लोगों में एक साझा राजनीतिक सोच विकसित की।
लॉर्ड लिटन की दमनकारी नीतियां (1876–1880): वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878), आर्म्स एक्ट और इल्बर्ट बिल विवाद (1883) ने भारतीयों को यह अहसास कराया कि अंग्रेजों के अधीन न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।
🏛️ 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना (1885)
प्रिया: सर, कांग्रेस की स्थापना में ए.ओ. ह्यूम की क्या भूमिका थी और इसका पहला अधिवेशन कहाँ हुआ था?
अमित सर: प्रिया, इसे 4 प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है:
संस्थापक: एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (A.O. Hume) ने देश भर के शिक्षित भारतीयों को एक मंच पर लाने में मुख्य भूमिका निभाई।
सुरक्षा वाल्व का सिद्धांत (Safety Valve Theory): कई इतिहासकारों (जैसे लाला लाजपत राय) का मानना था कि ह्यूम ने अंग्रेजों को 1857 जैसे किसी बड़े जन-विद्रोह से बचाने के लिए एक ‘सेफ्टी वाल्व’ के रूप में कांग्रेस का गठन कराया था, ताकि भारतीय अपना असंतोष शांतिपूर्ण तरीके से बाहर निकाल सकें।
प्रथम अधिवेशन: INC का पहला अधिवेशन 28-31 दिसंबर 1885 को बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ।
प्रथम अध्यक्ष एवं उपस्थिति: इसके प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C. Bonnerjee) थे और इसमें देश भर से 72 प्रतिनिधियों (Delegates) ने भाग लिया।
⚖️ 3. उदारवादी चरण (Moderate Phase: 1885–1905)
रोहन: सर, कांग्रेस के शुरुआती 20 वर्षों को ‘उदारवादी युग’ क्यों कहा जाता है? इनके मुख्य नेता और नीतियां क्या थीं?
अमित सर: रोहन, क्योंकि इस काल में कांग्रेस का नेतृत्व उच्च शिक्षित, मध्यमवर्गीय और कानूनविदों के हाथों में था, जो ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखते थे।
मुख्य नेता: दादाभाई नौरोजी (भारत के ग्रैंड ओल्ड मैन), गोपाल कृष्ण गोखले (गांधी जी के राजनीतिक गुरु), सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, फिरोजशाह मेहता और रासबिहारी घोष।
नीतियां व कार्यप्रणाली: उदारवादियों की रणनीति को 3Ps कहा जाता था—Petition (याचिका), Prayer (प्रार्थना), and Protest (विरोध)। वे हिंसा या सडक पर उतरने के बजाय संवैधानिक तरीकों, प्रस्तावों और ज्ञापनों के माध्यम से अंग्रेजों के सामने अपनी मांगे रखते थे।
प्रमुख मांगें:
विधान परिषदों का विस्तार और उसमें भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना।
उच्च प्रशासनिक सेवाओं (ICS) का भारत में ही आयोजन।
सैन्य खर्चों में कटौती और करों का बोझ कम करना।
कार्यपालिका (Executive) और न्यायपालिका (Judiciary) का पृथक्करण।
💸 4. दादाभाई नौरोजी का ‘धन के निष्कासन का सिद्धांत’ (Drain of Wealth Theory)
प्रिया: सर, उदारवादियों की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानी जाती है?
अमित सर: प्रिया, उदारवादियों की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धि ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण का पर्दाफाश करना था। दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक ‘Poverty and Un-British Rule in India’ (1901) में ‘धन के निष्कासन का सिद्धांत’ (Drain of Wealth Theory) प्रतिपादित किया।
क्या था यह सिद्धांत?: नौरोजी ने सिद्ध किया कि ब्रिटेन भारत से धन, कच्चे माल और संसाधनों को निष्कासित (Drain) कर रहा है और बदले में भारत को कोई पर्याप्त आर्थिक या भौतिक लाभ नहीं मिल रहा है।
निष्कासन के मुख्य रूप: होम चार्जेस (Home Charges – लंदन में इंडिया ऑफिस का खर्च), ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन, वेतन, और विदेशी पूंजी निवेश पर लाभांश।
प्रभाव: इस सिद्धांत ने इस भ्रम को तोड़ दिया कि ब्रिटिश शासन भारत के विकास के लिए लाभदायक है। इसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान किया।
📊 उदारवादी युग: एक नज़र में
| विषय / पहलू | मुख्य विवरण |
| स्थापना वर्ष व स्थान | 28 दिसंबर 1885, गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बॉम्बे |
| संस्थापक व प्रथम अध्यक्ष | ए.ओ. ह्यूम (संस्थापक), व्योमेश चंद्र बनर्जी (प्रथम अध्यक्ष) |
| प्रमुख उदारवादी नेता | दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, फिरोजशाह मेहता |
| कार्यप्रणाली (Methodology) | संवैधानिक तरीके (3Ps: Prayer, Petition, Protest) |
| सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धि | दादाभाई नौरोजी द्वारा ‘धन के निष्कासन का सिद्धांत’ (Drain of Wealth) प्रस्तुत करना |
| मुख्य सीमा / कमी | आंदोलन केवल शिक्षित मध्यम वर्ग तक सीमित था; आम जनता की भागीदारी कम थी |
‘सुरक्षा वाल्व का सिद्धांत’ (Safety Valve Theory)
सुरक्षा वाल्व का सिद्धांत’ (Safety Valve Theory) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना से जुड़ी एक अत्यंत चर्चित और ऐतिहासिक अवधारणा है।
इस सिद्धांत के अनुसार, ब्रिटिश सरकार ने 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना एक ‘सेफ्टी वाल्व’ (सुरक्षा वाल्व) के रूप में करवाई थी ताकि 1857 जैसी किसी नई सशस्त्र क्रांति या जन-विद्रोह को रोका जा सके।
🏛️ सिद्धांत की उत्पत्ति और मुख्य विचारक
संस्थापक की भूमिका: इस सिद्धांत का मुख्य केंद्र एक पूर्व ब्रिटिश सिविल सेवक एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (A.O. Hume) थे।
लॉर्ड डफरिन की सहमति: माना जाता है कि तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन ने ए.ओ. ह्यूम को कांग्रेस बनाने की सहमति इसीलिए दी थी ताकि शिक्षित भारतीयों का असंतोष सड़कों पर हिंसक रूप लेने के बजाय एक मंच पर संवैधानिक चर्चाओं के ज़रिए बाहर निकल जाए (ठीक वैसे ही जैसे प्रेशर कुकर का सेफ्टी वाल्व भाप को बाहर निकालकर विस्फोट रोकता है)।
प्रतिपादक (राष्ट्रवादी नेता): इस सिद्धांत को उग्रवादी राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय ने अपने समाचार पत्र ‘यंग इंडिया’ (1916) में प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने लिखा था कि “कांग्रेस लॉर्ड डफरिन के दिमाग की उपज थी।”
🔑 मुख्य विचार और तर्क (Core Arguments)
गुप्त रिपोर्टों का हवाला: ए.ओ. ह्यूम ने दावा किया था कि उन्हें शिमला में कई गुप्त सरकारी रिपोर्टें मिली थीं, जिनसे पता चलता था कि भारत का निचला तबका ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक और बड़े हिंसक विद्रोह की तैयारी कर रहा है।
असंतोष को शांतिपूर्ण दिशा देना: ह्यूम और अंग्रेजों का मानना था कि यदि शिक्षित भारतीयों को एक राजनीतिक मंच दे दिया जाए, तो वे जनता के असंतोष को कानूनी और अहिंसक तरीके से व्यक्त करेंगे, जिससे ब्रिटिश क्राउन का शासन सुरक्षित रहेगा।
⚖️ आधुनिक इतिहासकारों का दृष्टिकोण (Lightning Conductor Theory)
आधुनिक और उदारवादी इतिहासकार (जैसे विपिन चंद्र) ‘सुरक्षा वाल्व के सिद्धांत’ को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते। वे इसके विपरीत ‘तड़ित चालक का सिद्धांत’ (Lightning Conductor Theory) प्रस्तुत करते हैं:
गोपाल कृष्ण गोखले का तर्क: गोखले और शुरुआती भारतीय नेताओं ने ए.ओ. ह्यूम का इस्तेमाल एक ‘तड़ित चालक’ (Lightning Conductor) की तरह किया।
रणनीति: भारतीय नेता जानते थे कि यदि वे बिना किसी अंग्रेज की मदद के अपना कोई राष्ट्रीय संगठन बनाएंगे, तो ब्रिटिश सरकार उसे तुरंत दबा देगी। इसीलिए उन्होंने ए.ओ. ह्यूम को आगे रखकर सरकारी दमन से बचने का कवच (Protection Shield) प्राप्त किया।
📌 निष्कर्ष
यद्यपि अंग्रेजों ने कांग्रेस का गठन अपने स्वार्थ और सुरक्षा के लिए एक ‘सेफ्टी वाल्व’ की तरह चाहा था, लेकिन भारतीय राष्ट्रवादियों ने अपनी दूरदर्शिता से इसी ‘सेफ्टी वाल्व’ को आगे चलकर ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने वाले राष्ट्रीय आंदोलन के सबसे बड़े मंच में बदल दिया।
प्रिया: थैंक यू सो मच सर! उदारवादी युग की नीतियां, सीमाएं और दादाभाई नौरोजी का आर्थिक योगदान अब एकदम स्पष्ट हो गया है।
अमित सर: बहुत बढ़िया प्रिया और रोहन! हालाँकि उदारवादी अंग्रेजों से स्वराज्य हासिल नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने भारत में राजनीतिक चेतना का बीजारोपण किया। इसी के असंतोष से आगे चलकर 1905 का उग्रवादी चरण (Extremist Phase) और बंगाल विभाजन जन्म लेगा, जिसे हम अपनी अगली क्लास में पढ़ेंगे। Keep learning, keep growing!
Happy Learning!
Amit Poonia
Founder & Lead Educator | EnglishEraWithAmitPoonia